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अब्राम तारागण को गिनता है

अब्राम ने कहा कि वह एक महान राष्ट्र का पिता बनेगा।
CC BY-NC-ND
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रात का समय था और अब्राम भयभीत और उदास था।<br/>उसका कोई पुत्र नहीं था और वह बहुत बूढ़ा था।<br/>उनके घर की संपत्ति छोड़ने के लिए उनके पास कोई वारिस नहीं था।<br/>परन्तु परमेश्वर ने अब्राम को शांत करने के लिये उस से बातें कीं। – स्लाइड 1
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'अब्राम, डरो मत।<br/>तेरी ढाल और तेरा अत्यन्त बड़ा प्रतिफल हूँ।<br/>मैं हमेशा तुम्हारी मदद के लिए आऊंगा।' – स्लाइड 2
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अब्राम ने कहा, “परन्तु परमेश्वर, मेरा कोई पुत्र नहीं है और मैं बूढ़ा हो गया हूँ।<br/>मेरे घर की संपत्ति छोड़ने के लिए मेरा कोई वारिस नहीं है।' – स्लाइड 3
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परमेश्‍वर ने अब्राम से कहा, 'मैं तुझे एक पुत्र दूँगा, जो तेरा अपना उत्तराधिकारी होगा।<br/>तुम उसे अपनी संपत्ति देंगे और तुम्हारी विरासत साझा की जाएगी।<br/>इतने सारे सितारों वाले आकाश को देखो, जिनकी संख्या बहुत अधिक है!<br/>यहां तक ​​कि सितारों से भी अधिक संख्या में तुम्हारे उत्तराधिकारी होंगे!' – स्लाइड 4
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परमेश्वर के प्रति प्रेम से भरकर, अब्राम ने उसके वादे पर विश्वास किया।<br/>परमेश्वर प्रसन्न हुआ और अब्राम को धर्मी कहा।<br/>अब्राम ने यह जानते हुए कि परमेश्वर ईमानदार है, तारों की ओर एकटक देखता रहा। – स्लाइड 5
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