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यीशु मसीह के आशीर्वचन

यीशु, पहाड़ी उपदेश और 8 आशीषें।
CC BY-NC-ND
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यीशु भीड़ को अपनी ओर आते देख, पहाड़ पर चढ़ गया, – स्लाइड 1
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और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। और यीशु अपना मुंह खोलकर उन्हें यह उपदेश देने लगे, – स्लाइड 2
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‘धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। – स्लाइड 3
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‘धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। – स्लाइड 4
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‘धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। – स्लाइड 5
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‘धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। – स्लाइड 6
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‘धन्य हैं वे, जो दयावन्त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। – स्लाइड 7
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‘धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। – स्लाइड 8
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‘धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। – स्लाइड 9
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‘धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। – स्लाइड 10
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‘धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। – स्लाइड 11
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‘आनन्दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था॥’ – स्लाइड 12
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