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यीशु मसीह उपवास के बारे में सिखाता है

यीशु मसीह उपवास और हमारे प्रेरणा के बारे में सिखाता है।
CC BY-NC-ND
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यीशु मसीह एक पहाड़ पर अपने शिष्यों को उपदेश दे रहे थे। – स्लाइड 1
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जब तुम उपवास करो, तो कपटियों की नाईं तुम्हारे मुंह पर उदासी न छाई रहे, क्योंकि वे अपना मुंह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्हें उपवासी जानें; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। – स्लाइड 2
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जब तू उपवास करे तो अपने सिर पर तेल मल और मुंह धो। – स्लाइड 3
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ताकि लोग नहीं परन्तु तेरा पिता जो गुप्त में है, तुझे उपवासी जाने; इस दशा में तेरा पिता जो गुप्त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा l – स्लाइड 4
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अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहां कीड़ा और काई नष्ट करते हैं ..... – स्लाइड 5
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और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। – स्लाइड 6
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परन्तु अपने लिये स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। – स्लाइड 7
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क्योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा। – स्लाइड 8
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शरीर का दिया आंख है: इसलिये यदि तेरी आंख निर्मल हो, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला होगा। – स्लाइड 9
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परन्तु यदि तेरी आंख बुरी हो, तो तेरा सारा शरीर भी अन्धियारा होगा; इस कारण वह उजियाला जो तुझ में है यदि अन्धकार हो तो वह अन्धकार कैसा बड़ा होगा। – स्लाइड 10
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कोई मनुष्य दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वह एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। – स्लाइड 11
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तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते”। – स्लाइड 12
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