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यीशु की परीक्षा

यीशु जंगल में चालीस दिनों तक निराहार रहा, और शैतान उसकी परीक्षा करता हैं।
CC BY-NC-ND
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तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्लीस से उस की परीक्षा हो। – स्लाइड 1
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वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्त में उसे भूख लगी। – स्लाइड 2
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तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं। <br/>उस ने उत्तर दिया; "कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।" – स्लाइड 3
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तब इब्लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया।<br/>और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, "कि वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।" – स्लाइड 4
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यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, "कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।" – स्लाइड 5
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फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका विभव दिखाकर उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा। – स्लाइड 6
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तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, "कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।" – स्लाइड 7
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तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे॥ – स्लाइड 8
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