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पहले शिष्यों का बुलाया जाना

पतरस ने नाव के दूसरी तरफ अपना जाल डाल दिया।
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अब यीशु गन्नेसरत की झील के किनारे पर खड़ा था, और परमेश्वर का वचन सुनने के लिए भीड़ थी। – स्लाइड 1
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उसने झील से दो नावों को देखा, लेकिन मछुआरे उनमें से निकल गए थे और अपना जाल धो रहे थे। – स्लाइड 2
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उन नावों में से एक पर जो शमौन की थी, चढ़कर, उस ने उस से विनती की, कि किनारे से थोड़ा हटा ले चले। – स्लाइड 3
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तब वह बैठकर लोगों को नाव पर से उपदेश देने लगा। – स्लाइड 4
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जब वे बातें कर चुका, तो शमौन से कहा, ‘गहिरे में ले चल, और मछिलयां पकड़ने के लिये अपने जाल डालो।’ – स्लाइड 5
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शमौन ने उसको उत्तर दिया, कि हे स्वामी, हम ने सारी रात मिहनत की और कुछ न पकड़ा; तौभी तेरे कहने से जाल डालूंगा। – स्लाइड 6
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जब उन्होंने ऐसा किया, तो बहुत मछिलयां घेर लाए, और उन के जाल फटने लगे। – स्लाइड 7
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इस पर उन्होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव पर थे, संकेत किया, कि आकर हमारी सहायता करो: और उन्होंने आकर, दोनो नाव यहां तक भर लीं कि वे डूबने लगीं। – स्लाइड 8
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यह देखकर शमौन पतरस यीशु के पांवों पर गिरा, और कहा; हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्योंकि मैं पापी मनुष्य हूं। क्योंकि इतनी मछिलयों के पकड़े जाने से उसे और उसके साथियों को बहुत अचम्भा हुआ। और वैसे ही जब्दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना को भी, जो शमौन के सहभागी थे, अचम्भा हुआ:। – स्लाइड 9
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तब यीशु ने शमौन से कहा, मत डर: अब से तू मनुष्यों को जीवता पकड़ा करेगा। – स्लाइड 10
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और वे नावों को किनारे पर ले आए और सब कुछ छोड़कर उसके पीछे हो लिए॥ – स्लाइड 11
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