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यीशु का क्रूस पर चढ़ाया जाना

यीशु ने हमारे पापों के लिए क्रूस पर कष्ट उठाया।
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सिपाहियों ने यीशु के कपड़े आपस में बाँट लिए। बिना किसी जोड़ के एक में सिला हुआ, अंदर का परिधान, बाँटने के लिए बहुत कीमती था तो उन्होंने उसपर चिट्ठिया डालीं। उसने भजन सहिंता 22:18 की भविष्यवाणी को पूरा कर दिया ‘वे मेरे वस्त्र आपस में बाँटते हैं और मेरे वस्त्रों के लिए उन्होंने चिठ्ठीयाँ डालीं।’ – स्लाइड 1
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यीशु के क्रूस के पास उसकी माता मरियम, क्लोपास की पत्नी मरियम, मरियम मगदलीनी और यहुन्ना खड़े थे। – स्लाइड 2
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यीशु ने अपनी माता मरियम से कहा, ‘यह तेरा पुत्र है।’ और फिर यूहन्ना से उसने कहा, ‘यह तेरी माता है।’ उस समय के बाद, यूहन्ना मरियम की देखभाल करने के लिए अपने घर ले गया। – स्लाइड 3
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आने-जाने वाले सिर हिला-हिलाकर ज़ोरों से उसकी निंदा करने लगे और कहने लगे, ‘तूने कहा था कि तू मंदिर को गिरा कर इसे तीन दिन में वापस बना सकते हो, क्रूस से ऊतर और अपने आप को बचा।’ प्रधान याजक और पुरनियें ठट्ठा करने लगे, ‘इसने औरों को बचाया परन्तु अपने आप को नहीं बचा सका।’ सिपाहियों ने भी साथ मिलकर ठट्ठा करने लगे। – स्लाइड 4
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उनमें से एक अपराधी ने यीशु की निंदा करने वालों के साथ भाग लिया। ‘क्या तू मसीहा नहीं? खुद को बचा और हमें भी!’ – स्लाइड 5
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परन्तु दूसरे अपराधी ने उसे फटकारा। ‘क्या तू परमेश्वर से नहीं डरता? हमें हमारे किये की सही सज़ा मिल रही है परन्तु इस मनुष्य ने कुछ गलत नहीं किया।’ तब वह मुड़ा और बोला, ‘यीशु, जब तू अपने राज्य में आये तो मुझे स्मरण रखना।’ – स्लाइड 6
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यीशु ने उत्तर दिया, ‘मैं तुझसे सच सच कहता हूँ। आज ही तू मेरे साथ स्वर्ग में होगा।’ – स्लाइड 7
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दोपहर से लेकर, तीसरे पहर तक सारा देश में अंधेरा छाया रहा। – स्लाइड 8
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तीसरे पहर के निकट, यीशु ने ऊँचे स्वर में पुकारकर कहा, ‘हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?’ – स्लाइड 9
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एक स्पंज को सिरके में डूबोकर यीशु को पीने के लिए दिया गया। – स्लाइड 10
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फिर, ऊँचे स्वर में, यीशु ने चिल्लाकर बोला, ‘पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ।’ फिर उसने अपनी आखिरी सांस ली। – स्लाइड 11
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रोमी सूबेदार, जिसे क्रूस पर चढ़ाने का अधिकार सौंपा गया था, जो यीशु को मरता हुआ देख रहा था, अचानक परमेश्वर की बडाई करने लगा और बोला, ‘सचमुच यह मनुष्य परमेश्वर का पुत्र था।’ – स्लाइड 12
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यरूशलेम के नगर में, मंदिर के अंदर के भाग में, वह पर्दा जो अति पवित्र स्थान को अलग करता था ऊपर से नीचे तक फट गया  धरती डोल गई, चट्टानें तड़क गईं, कब्रें खुल गईं। कब्रों में से मुर्दे जी उठे और नगर में गए और बहुतों को दिखाई दिए। – स्लाइड 13
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जैसे ही शाम हुई और अगले दिन सब्त का दिन था, पिलातुस ने क्रूस पर चढ़ाये हुओं की टाँगें तोड़ने की आज्ञा दी ताकि वे जल्दी से अपने प्राण छोड़ दें। यीशु के दोनों तरफ के अपराधियों की टाँगें तोड़ दी गईं। – स्लाइड 14
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क्योंकि यीशु मर चुका था, तो एक सिपाही ने उसकी एक तरफ भाला घोंपा और उसका लहू बाहर बहने लगा। यह भविष्यवाणी पूरी हो गयी कि, ‘उसकी एक भी हड्डी टूटने न पाएगी’ (भजन संहिता 34:10), और ‘वे उसको देखेंगे जिसको उन्होंने बेधा है’ (जकर्याह 12:10)। – स्लाइड 15
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अरिमतिया का, यूसुफ नामक, एक अच्छा और सच्चा मनुष्य, जो यहूदी समिति का एक सदस्य था, पिलातुस के पास गया और यीशु को दफ़नाने की आज्ञा माँगी। पिलातुस ने आज्ञा दे दी। – स्लाइड 16
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यूसुफ ने शव लिया, उसे उज्ज्वल चादर में लपेटा और उसे चट्टान में खुदी हुई एक खाली कब्र में ले गया। – स्लाइड 17
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एक बड़े पत्थर को दरवाज़े पर लगाया गया। फिरीसी, ये जानते थे कि यीशु ने कहा था, ‘तीन दिन बाद में फिर जी उठूँगा’, पिलातुस को कब्र पर एक पहरेदार रखने को बोला। कब्र को बंद कर दिया गया और एक पहरेदार रख दिया गया। – स्लाइड 18
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