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यीशु एक अंजीर के पेड़ को श्राप देते हैं

यीशु उस विश्वास के बारे में सिखाता है जो पहाड़ों को हिला देता है।
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अगले दिन जब वे बैतनिय्याह से निकल रहे थे, यीशु भूखा था। वह दूर से अंजीर का एक हरा-भरा पेड़ देखकर यह जानने को गया, कि उस में कोई फल है कि नहीं। – स्लाइड 1
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जब वह उसके पास पहुँचा, तो पत्तों को छोड़ और कुछ न पाया, क्योंकि अंजीरों का मौसम न था। – स्लाइड 2
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फिर उसने पेड़ से कहा, 'अब से कोई तेरा फल कभी न खाए।' और उसके चेलों ने उसे यह कहते सुना। इसके बाद वे यरूशलेम गए और उसी शाम को लौट आए। – स्लाइड 3
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दूसरे दिन सबेरे चलते चलते उन्‍होंने क्या देखा, कि अंजीर का पेड़ जड़ से सूख गया है। – स्लाइड 4
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पतरस को याद आया और उसने यीशु से कहा, 'रब्बी, देखो! जिस अंजीर के पेड़ को तू ने शाप दिया था वह सूख गया है! – स्लाइड 5
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'ईश्वर में विश्वास रखो,' यीशु ने उत्तर दिया। 'मैं तुम से सच कहता हूँ, यदि कोई इस पहाड़ से कहे, 'जा, अपने आप को समुद्र में डाल दे,' और अपने मन में सन्देह न करे, वरन विश्वास करे, कि जो वे कहते हैं वह हो जाएगा, तो उसके लिये हो जाएगा। – स्लाइड 6
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'इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि जो कुछ तुम प्रार्थना करके मांगो तो प्रतीति कर लो कि तुम्हें मिल गया, और तुम्हारे लिये हो जाएगा। और जब तुम खड़े होकर प्रार्थना करते हो, यदि तुम्हारे मन में किसी के विरोध में कुछ हो, तो उसे क्षमा करो, जिस से कि तुम्हारा स्वर्गीय पिता तुम्हारे पाप क्षमा करे। – स्लाइड 7
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