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नासरत में यीशु को अस्वीकार किया जाना

यीशु नासरत के आराधनालय में यशायाह से पढ़ता है।
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यीशु नासरत में आया, जहाँ उसका पालन-पोषण हुआ था। – स्लाइड 1
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वह आराधनालय में चला गया जैसा कि वह हर सप्ताह सब्त के दिन करता था। – स्लाइड 2
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यीशु दुसरे लोगों के साथ जाकर बैठ गया जो वहाँ आराधना करने और सीखने आए हुए थे। – स्लाइड 3
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जब शास्त्र पढ़ने का समय आया तब वह खड़ा हुआ और यशायाह भविष्यद्व्क्ता का सूचीपत्र उसे दिया गया। – स्लाइड 4
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यीशु ने सूचीपत्र को खोला और एक जगह को निकाल कर उसे पढ़ने लगा। (यशायाह 61:1-2) – स्लाइड 5
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‘प्रभु का आत्मा मुझ पर है, क्योंकि उसने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया। – स्लाइड 6
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‘उसने मुझे इसलिए भेजा ताकि में बन्धुओं को छुटकारे का और अन्धों को दृष्टि पाने का संदेश दूँ... – स्लाइड 7
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‘... पीड़ितों को छुड़ाऊँ और परमेश्वर के अनुग्रह के वर्ष का प्रचार करुँ।’ – स्लाइड 8
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तब उसने शास्त्रों को बंद किया और सेवक को वापस करके बैठ गया। – स्लाइड 9
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आराधनालय में बैठे हुए सब लोगों कि आखें उस पर लगी हुई थीं। – स्लाइड 10
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तब यीशु ने यह घोषणा की, कि ‘आज यह शास्त्र तुम्हारे सामने हुए पूरा हुआ है।’ – स्लाइड 11
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उन्होंने पूछा कि, क्या यह यूसुफ का पुत्र नहीं?’ – स्लाइड 12
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‘यीशु ने उनसे कहा कि ‘तुम मुझे यह कहावत अवश्य कहोगे:’कि हे वैद्ध तू अपने आपको चंगा कर!’ ‘और तुम यह भी चाहोगे कि जो चमत्कार मैंने कफरन्हूम में किए वो में नासरत में भी करूँ। पर कोई भी भविष्यद्व्क्ता अपने देश में स्वीकार नहीं किया जाता। – स्लाइड 13
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‘जब बड़ा आकाल पड़ा, तब एलिय्याह के समय बहुत सी यहूदी विधवाएं थीं। पर एलिय्याह को सैदा देश के सारपत नगर की एक विधवा के पास भेजा गया। इलीशा भविष्यद्वक्ता के समय में इस्राइल में बहुत से कोढ़ी थे, पर नामान जो सीरयाई था उसको छोड़ उन में से कोई भी चंगा नहीं किया गया। – स्लाइड 14
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जब उन्होंने यह सुना तो जो सब आराधनालय में थे क्रोध से भर गए और उन्होंने यीशु को भवन से निकलते समय यीशु का पीछा किया। – स्लाइड 15
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तब वे यीशु को उस शहर से बाहर ले गए। – स्लाइड 16
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... उस पहाड़ी कि चोटी पर जहाँ पर उनका शहर बसा हुआ था। – स्लाइड 17
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उनका इरादा यह था कि वह यीशु को पहाड़ी से गिरा कर मार दे – स्लाइड 18
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पर यीशु मुड़ा ... – स्लाइड 19
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... और वह क्रोधित भीड़ में से निकलकर अपने मार्ग पर चला गया। – स्लाइड 20
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