हम सामान्य आगंतुक आंकड़े एकत्र करने के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं लेकिन व्यक्तिगत जानकारी नहीं। गोपनीयता नीति

यूसुफ और पोतीपर की पत्नी

पोतीपर की पत्नी ने यूसुफ पर झूठा आरोप लगाया।
योगदानकर्ता फ्री बाइबिल इमेजेस
CC BY-SA
पर्सनल और टीचिंग इस्तेमाल की इजाज़त है व्यक्तिगत एवं शिक्षण उपयोगवाणिज्यिक उपयोग की अनुमति व्यावसायिक उपयोगव्युत्पन्न कार्यों की अनुमति है व्युत्पन्न कृतियाँA.I. अनुकूलन की अनुमति A.I. रूपांतरण
1
युसूफ को पोतीपर ने दास के रूप में मोल ले लिया वह अपने स्वामी के लिए कठिन परिश्रम करने लगा। पोतीपर फ़िरौन का हाकिम और अंगरक्षकों का प्रधान था। – स्लाइड 1
2
यूसुफ अपने हर काम को अच्छे से करता था और पोतीपर उसकी मेहनत को देखकर प्रभावित हो गया। परमेश्वर ने यूसुफ के कारण पोतीपर को आशीषित किया और उसे हर काम में सफल किया। – स्लाइड 2
3
पोतीपर ने यूसुफ को घर के नौकरों और बाहर खेतों में काम करने वालों के अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया। यूसुफ ज़िम्मेदारी लेने में बहुत अच्छा था और हर चीज़ अच्छे से चलाता था। – स्लाइड 3
4
बहुत जल्द ही यूसुफ ने पोतीपर का इतना विश्वास जीत लिया किया कि उसके मालिक को किसी बात की चिंता करने की ज़रूरत न पड़ती सिवाए इसके कि उसे क्या खाना चाहिए। – स्लाइड 4
5
यूसुफ एक रुपवान् पुरुष हो गया और पोतीपर की पत्नी उसकी ओर आकर्षित हो गयी । – स्लाइड 5
6
एक दिन जब वह अकेला काम कर रहा था तो वह उसके पास आयी। – स्लाइड 6
7
उसने उससे माँग करी, ‘मेरे साथ बिस्तर पर आ।’ – स्लाइड 7
8
यूसुफ ने उत्तर दिया, ‘तेरे पति ने तुझे छोड़ हर चीज़ का मुझे अधिकारी बनाया है। वह मुझ पर विश्वास करता है। मैं अपने प्रति उसके विश्वास को कैसे तौड़ सकता हूँ?’ – स्लाइड 8
9
यूसुफ ने विरोध किया, ‘मैं ऐसी दुष्टता और परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन कैसे कर सकता हूँ?’ – स्लाइड 9
10
यूसुफ, उसके रास्ते से जितना दूर हो सकता था उतना दूर रहने की कोशिश करने के लिए, अपने काम को दौड़ा गया। – स्लाइड 10
11
परन्तु वह हर दिन उसकी ओर दृष्टि लगाती ... – स्लाइड 11
12
... और उसे पथभ्रष्‍‍ठ करने के लिए उसे प्रलोभन देती। – स्लाइड 12
13
परन्तु यूसुफ ने पोतीपर के विश्वास तोड़ने और परमेश्वर की आज्ञा का उलंघन करने से मना कर दिया। – स्लाइड 13
14
एक दिन यूसुफ घर में व्यस्त था। पोतीपर काम पर गया था और घर के सेवकों में से कोई भी घर के अंदर न था। – स्लाइड 14
15
पोतीपर की पत्नी ने फिर से यूसुफ को पथभ्रष्‍‍ठ करने की कोशिश की। – स्लाइड 15
16
उसने उस पर भयंकर रूप से झपट्टा मारा ... – स्लाइड 16
17
यूसुफ ने विरोध किया और उसकी पकड़ से छूटने का प्रयत्न किया। – स्लाइड 17
18
वह तुरंत बाहर भाग गया। पोतीपर की पत्नी ने उसके अंगरखे को पकड़ लिया परन्तु यूसुफ उस से बच कर भाग निकला। – स्लाइड 18
19
यूसुफ पोतीपर की पत्नी को उसके अंगरखे के साथ छोड़कर भाग खड़ा हुआ। – स्लाइड 19
20
यूसुफ घर से बाहर भाग गया। पोतीपर की पत्नी ने घर के दूसरे सेवकों को इकट्ठा किया और कुटिलता से रोकर बोलने लगी, ‘यूसुफ ने छेड़खानी करने की कोशिश की। मैं चिल्लाई और वह भाग खड़ा हुआ।’ – स्लाइड 20
21
जब पोतीपर वापस लौटा तो उसने यूसुफ का अंगरखा उसे दिखाया। ‘उस इब्रानी दास ने मुझसे छेड़खानी करने की कोशिश करी। मैं चिल्लाई और वह अपना अंगरखा छोड़कर भाग खड़ा हुआ।’ – स्लाइड 21
22
पोतीपर क्रोधित हो गया। उसने तुरंत यूसुफ को पकड़ने का और बंदीग्रह में डालने का आदेश दिया। – स्लाइड 22
23
यूसुफ ने अपने बेगुनाह होने का विरोध किया। परन्तु एक इब्रानी दास पर किसी ने विश्वास नहीं किया। उसे फ़िरौन के बंदीगृह में ले जाया गया। – स्लाइड 23
24
पहले उसके भाईयों ने उसे धोखा दिया। अब उसे गलत तरीके से बंदीगृह में डाला गया। जीवन यूसुफ के लिए बहुत अन्यायपूर्ण लग रहा था परन्तु वह जानता था कि परमेश्वर उसके साथ था। वह अकेला नहीं था। – स्लाइड 24
25
स्लाइड 25